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कलयुग का प्रभाव

                
                                                         
                            मेरे मकान मालिक का तोता
                                                                 
                            
जब खुश खूब होता
"मम्मी,मम्मी,पापा,पापा" बोलता है
राम राम कभी नहीं वह बोलता है
" मिट्ठू! कहो,राम राम " सिखाते रह गए सभी
पर " राम,राम" बोला नहीं वह कभी
क्या कलयुग का उस पर भी प्रभाव है?
या बढ़ गया उसका भी भाव है?
कलयुग में संस्कार का घोर अभाव है
कोई कुछ अच्छा कभी सीखता नहीं
कोई कुछ अच्छा कभी लिखता नहीं
कैसे सुधरेगी यह मही?
क्या रह जाएंगे हम ऐसे ही?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 hours ago

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