कितने झुकोगे यार!
जितना झुकोगे,झुकाएगा संसार
तनो तो एक बार
फिर करेगा स्वीकार
करेगा तेरा सत्कार
यह जुल्मी संसार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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