कौन है वह शहर
सामने जिसके जमाना शीष झुकाता है?
अंततः इस शहर
में आकर पितरों को तारा जाता है
कौन है वह शहर
सामने जिसके जमाना सर्वस्व अर्पित करता है
आकर हर वर्ष अपना शीष धरता है
कौन है वह नगर
सामने जिसके अंबर झुक जाता है?
बन कर मनुज विष्णु को धरा पर आना पड़ जाता है
कौन है वह स्वर
सामने जिसके हर मंत्र रुक जाता है?
और शीष सबका झुक जाता है
कौन है वह नदी नहर
जिसमें जल नहीं,पर हर इंसान नहाता है?
कौन है वह शहर
जहां आकर सिद्धार्थ, बुद्ध बन जाता है?
कहां है मंगला गौरी, ब्रह्मयोनि,श्रृंग स्थान?
कहां है राम शिला सा पावन स्थान?
कहां है पावन निरंजना
जहां आई
अहिल्याबाई
सी वीरांगना?
कहां है गयासुर का पौराणिक आख्यान
जिसे वखानता गरूड़ पुराण
कौन है वह शहर
जहां नित होता पिंडदान है?
कहां वह स्वर्ग से सुंदर स्थान है?
कौन है वह पावन स्थान
आई जहां सीताजी करने पिंडदान?
है यहीं वह पावन स्थान
जहां उतरे थे विष्णु भगवान
दिए अमर वरदान
कि तर जाए जहां पूरा खानदान
करके पिंडदान
कहां है विष्णु पद मंदिर?
कहां है महावोधि मंदिर?
बौद्ध का पावन स्थली
है यहीं
है यहीं
जानती है मही
उड़ता यहां नित विमान है
दिखते यहां नित वायुयान है
वह यहीं पावन स्थान है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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