ईरान का तेल
बेचने का खेल
चल रहा है
दादा गरीबों को कुचल रहा है
दादागिरी कब तक चलेगी?
रंगदारी कब तक चलेगी?
देख रहा हूं मैं भी
देख रहे हो तुम भी
वह दिन भी आएगा
जब तानाशाह कुचला जाएगा
दुनिया वालों! एक हो जाओ
तानाशाहों को कुचल कर आओ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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