आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

धन्य धन्य बा गया नगरी

                
                                                         
                            धन्य धन्य बा गया नगरी
                                                                 
                            
बसल बा फल्गु के कगरी
जहां बा ढेरे पर्वत पठार
जहां मिलल तरे के आधार
जहां गूंजे भोरे भोरे
होत सवेरे
मंदिर में हनुमान चालीसा
मंदिर मंदिर में राम चालीसा
और मस्जिद में अजान
इहे ह हमार हिंदुस्तान
के असल पहचान
जहां गयासुर कईलें तप भारी
होके आभारी
अईलें विष्णु भगवान
देंले बड़ बड़ बरदान
जे करी पिंडदान
पितृ पक्ष के बेला में
आके गया के मेला में
जईहे ओकर सात पुहुत तरी
जे आके गया में पिंडदान करी
अईसन पावन ह ई गया नगरी
जहां आके गौतम बनलें बुद्ध भगवान
जहां आके करोड़ों लोगवा करे पिंडदान
गया जी के जाने-माने हिंदुस्तान
गया जी के बा हिंदुस्तान में प्रथम स्थान
गया जी के बा एह जहान में प्रथम स्थान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर