आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चेतक की वीरता

                
                                                         
                            चेतक की ऊंची उड़ान देखो
                                                                 
                            
जैसे उड़ रहा तेज विमान देखो
मचाया हलचल देखो जहान में
मचाया हलचल आसमान में
चेतक उड़ रहा तेज तूफान से
कर रहा प्रतिस्पर्धा बाज से
उड़ रहा तेज पक्षी राज से
लड़ रहा जांबाज जवान जैसे
उड़ रहा वीर हनुमान जैसे
कहो,उसे हय मैं कहूं कैसे?
कुचल रहा शत्रुओं को खुरों के तले
देख रहा शत्रुओं को राणा से पहले
वीरता में राणा से वह कहीं कम नहीं था
स्वामी भक्ति में वह हनुमान से कम नहीं था
थे राणा, राम चेतक के लिए
था चेतक,हनुमान राणा के लिए
रण में जब तक दोनों वीर थे
शत्रुओं के छूटते नहीं तीर थे।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर