स्वदेश को रखो आगे
खुद को रखो पीछे
देश जाएगा आगे
तब तुम कैसे रहोगे पीछे?
देश को आगे बढ़ने दो
नई चढ़ाइयां चढ़ने दो
देश को आगे बढ़ाओ
देश को विकसित बनाओ
खुद का स्वार्थ भूल जाओ
देश के लिए बन शूल फूल जाओ
जरूरत पड़े तो बनो फूल
जरूरत पड़े तो बनो शूल
सब कुछ जाओ भूल
पर देश को न जाओ कभी भूल।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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