गंगा मां का पावन पानी लहर लहर लहराए
गंगा के किनारे जन्म लेकर हम इतराएं
गंगा के दोमट माटी में खरबूजा खीरा
परवल,कंकड़ी और सोना चांदी हीरा
हमारे हिम्मती कर्मठ कृषक उपजाएं
जहां जवान,बुढ़े बच्चे स्वाभिमान से
साहस से और बड़े बड़े बलिदान से
अपनी अमिट निशानी छोड़ पहचान बनाएं
उस वीरों की धरती में जन्म लेकर हम इतराएं
जहां मंगल पांडे,चित्तू पांडे जैसे वीर पाएं जाएं
कहते उसे बागी बलिया, बागी बैरिया
तपी बलिया, त्यागी बलिया
जो जिद्द पर उतर आएं
तो अंबर को भी धरा पर लाएं
तलवार,भाला, बरछी बच्चे भी चलाएं
नित पावन गंगा में डुबकी हम लगाएं
तब जग जीत कर घर हम आएं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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