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जमाना देखा करता है मुझे हैरत से

                
                                                         
                            बात कोई कभी बिगड़े न मेरी गफलत से
                                                                 
                            
तुम वाकिफ़ हो या न हो मेरी हालत से
तुमको मुझसे और मुझे तुमसे शिकायत होगी
पर शिकायत हमें होगी नहीं इस उल्फ़त से
ये तकाजा था मैं खामोश ही रहा आता
फ़िर भी मजबूर हो जाता हूं किसी आदत से
कितनी गुंजाइशों को हमने साथ बनाए रखा
कुछ तो हमें जिए जाना भी था सदाकत से
एक बार और फिर मांगेगे मौका जीने का
एक बार और फिर लड़ना है और ताकत से
हम अनाड़ी थे जो क्या क्या बचा के रखे थे
आसमां ने रखा हमें महफूज और हिफाजत से
मेरे चेहरे पे उतर आती हैं दिल की बातें
और जमाना देखा करता है मुझे हैरत से
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43 मिनट पहले

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