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ये कैसी करामात हुई है

                
                                                         
                            ये कैसी करामात हुई है
                                                                 
                            
सहरा में बरसात हुई है
जीने से बेजार थे हम तो
जीने की दरख्वास्त हुई है
औरों की सुनते थे, हमपे
इश्क के जैसी बात हुई है
सपनों ने संदेशा भेजा
सो भी जाओ रात हुई है
मेरे सरल,सहज जीवन में
कितनी खुराफात हुई है
भूल गया मैं खुद को,जबसे
तुमसे मुलाकात हुई है
हर बाजी मै जीत चुका था
उठते उठते मात हुई है
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एक घंटा पहले

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