जो न होना था हो गया आखिर
इश्क होना था हो गया आखिर
दस्तक देकर न कोई लौट जाए
मैं जागते जागते सो गया आखिर
उसको मंजिल की राह पर लाकर
मैं खुद सफर में खो गया आखिर
नाखुदा पर मुझे शक भी नहीं था
मेरी कश्ती डूबो गया आखिर
आखिर कब तक वो दिलासे देता
गले लग लग के रो गया आखिर
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