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पास आता था नहीं वो दूर भी जाता न था

                
                                                         
                            इस ज़मीं से उस फ़लक के बीच में क्या क्या न था
                                                                 
                            
जब मेरे नजदीक था वो हौसला मुझमें न था
जा रहे हैं जा चुके हैं लम्हों की कीमत थी क्या
सोचता हूं आज, उस पल मुझको अंदाजा न था
फूल से क्या चाहिए था मुझको खुशबू के सिवा
तोड़कर मुट्ठी में कर लूं ये कभी चाहा न था
जिंदगी को छोड़ दूं या जिंदगी को थाम लूं
साथ या जीता रहूँ अब तक तो कुछ सोचा न था
शाम आती जा रही थी दिन भी ढलता जा रहा
उन नज़ारों से निगाहें मैं हटाता भी न था
जानकर ये और भी हैरत में थे दुनिया के लोग
खो के भी अपना सभी कुछ क्यों मैं पछताता न था
कर भी सकता था मैं क्या अफसोस करने के सिवा
पास आता था नहीं ,वो दूर भी जाता न था
दरिया तेरे उथलेपन का आज भी अफसोस है
तैर सकता था नहीं मैं डूब भी सकता न था
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1 hour ago

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