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इस तरह तब्दीलियां आती रहीं

                
                                                         
                            सारी रानाईयां भी ढलती रहीं
                                                                 
                            
शमां लम्हा लम्हा पिघलती रही
इस तरह तब्दीलियां आती रहीं
जिस तरह हसरतें निकलती रहीं
सब धुंधलके यहां छंटते भी रहे
असलियत खुल के यूं दिखती रही
हर नाटक के पटाक्षेप हुए
जिंदगी फिर आगे भी बढ़ती रही
उतर गई बाढ़ आ आ कर
लहरें कुछ और कम उछलती रहीं
मैं सिमटता रहा हूं हर पल ही
मेरी दुश्वारियां बिखरती रहीं
हर कदम पर हवाएं रुक कर
मेरी बिखरी जुल्फें संवारती रहीं
मंजिलों के निशान दिखने लगे
अगवानी को मशाल जलती रही
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एक घंटा पहले

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