सन अट्ठारह सौ पचहत्तर, इकतीस अक्टूबर की सायं
भारत का गुजरात प्रांत था जगह नाडियाद कहलाय
साधारण किसान-परिवार में, जन्मा लौह पुरुष है जाय।
बचपन से साहस ऐसा था, बड़े-बड़े शूरवीर घबराय,
अपनी आँख के पास का फोड़ा, अपने हांथो रहा जलाय।
शारीरिक शक्ति से ज़्यादा, उनका मन मजबूत दिखाय,
फिरंगियों को उनके सपने, रेत पे बने महल दिखलाय
बारडोली की जनता पर जब, रही हुकूमत टैक्स बढ़ाय,
संगठनात्मक क्षमताओं का उनको दीन्हा स्वाद चखाय।
नीलामी की बोली में भी, ना कोई बोलीदार दिखाय,
अंग्रेज़ों के होश उड़ रहे, क्यों, कैसे, कुछ समझ न आय।
आख़िर अंग्रेज़ों को झुकाकर, अपना लोहा लिया मनाय,
इस आंदोलन ने वल्लभ को, है दीन्हा 'सरदार' बनाय।
अगणित बलिदानों ने आख़िर, अंग्रेज़ों को दिया भगाय,
जाते-जाते फ़िरंगियों ने, काले नाग दिये फै़लाय।
पाँच सौ बासठ देसी रियासतें, मनमर्जी थीं रही चलाय,
तब सरदार सोच रहे मन में, ये देंगे फिर से बंटवाय।
अति गंभीर समस्या थी ये, ना कोई हल पड़े दिखाय,
तब दायित्व पटेल को सौंपा, दूजा हल कर पाये नाय।
सूझ-बूझ का परिचय दीन्हा, साम-दाम-से रहे मिलाय,
जिस राजा की जैसी जरूरत उसको वैसा पाठ पढ़ाय
प्री वी पर्सेज पूर्ण संरक्षण देकर सबको लिया मनाय
लगभग सबको काबू कर लिया, पर दो बचे मानते नाय
जूनागढ़ भारत की रियासत नाम महाबत खान कहाय
सौ में अस्सी हिंदू बस रहे मुस्लिम केवल बीस है भाय पाकिस्तानी
विलय पत्र पर उसने दस्तखत दिए बनाय
त्वरित प्रभाव से स्वीकृति देकर वह भी मंशा रहा जताय
संप्रभुता पर भारत की अब गहरा संकट पड़ा दिखाय
इस संकट को फिर भारत से दिया पटेल ने दूर भगाय
जूनागढ़ पर किया आक्रमण जनता से विद्रोह कराय
बिगड़ी हालत भगा महावत स्वान खजाना साथ ले जाय
पाकिस्तानी एयर फोर्स गईं उसको अपने साथ लिवाय
एक समस्या खत्म हुई ना दूजी सर पर चढ़ी दिखाय
जूना गढ़ की देखा देखी आंख हैदराबाद दिखाय
वो उस्मानी अली खान भी अपनी अकड़ रहा दिखलाय
दुनिया का सबसे अमीर वो शख्स उस समय पड़े दिखाय
यथा स्थित का समझौता वह काले मन से करता जाय
समय मिला हथियार खरीदा कासिम को भी लिया मिलाय
रजाकार की फौज बनाई दमन नीति फिर रहा चलाय
हिंदू कोई विद्रोह करे ना मनसा साफ़ पड़े दिखलाय
बातचीत से कोई हल निकले इच्छा नेहरू रहे जाताय
पर पटेल को यह मनमानी कैंसर जैसा घाव दिखाय
उसकी पीड़ा ने पटेल को ज्वालामुखी है दिया बनाय
फिर विस्फोट हुआ है ऐसा ऑपरेशन पोलो चल जाय
केवल पांच दिनों के अंदर आत्मसमर्पण लिया कराय
वही हैदराबाद हमारा फिर तेलंगाना राज्य बन जाय
वह सच्चे सपूत भारत के भारत को गए एक बनाय
उनको नमन उन्हें है बंदन उनकी महिमा रहे बताय
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