अश्रुपूरित श्रद्धांजलि : सुषमा स्वराज
( एक महान राजनीतिक पुरोधा)
सुशोभित सुषमा आपने किया,
भारतीय राजनीतिक पटल को।
स्वहित तज देशहित काज किया,
ये नाज था आप पे अटल को।।
विसंगति की संगति लगी रही,
फिरभी लगी रही दिनरात वो।
ये आश थी मन मे जो उनके,
कल तो बदलेंगे ही हालात वो।।
पक्ष की प्रतिपक्ष की गुमान थी,
और थी सदन की एक गूँज वो।
धन्य धन्य तू थी हे महमानुषी,
और थी धन्य रक्त की हर बूँद वो।।
श्वास चाहे क्यूँ न आखिरी रही,
देशहित की करती रही बात वो।
प्रभु आश लगा बस ये कामना रही,
भेज देना एक सुषमा स्वराज वो।।
अनिल अग्रहरि ' ' सागर ' '
कवि, साहित्यकार व मोटिवेशनल स्पीकर
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