अगर तुम जैसा कोई फिर ना मिला तो?
हाँ, नहीं मिलेगा
मैं जानता हूँ,
कभी नहीं मिलेगा।
तुम्हारे जैसा न कोई जन्मा है,
न कोई जन्मेगा
तुम एक लय हो
जिसे ईश्वर ने मौन में रचा है।
तुम तुलना नहीं,
अद्वैत हो।
तुम 'तुम' हो
बिना किसी संज्ञा, बिना किसी सीमा।
तुम्हारे भीतर
सरस्वती की वाणी है,
शिव की गहराई है,
और राधा का निस्वार्थ प्रेम।
तुम सौंदर्य की परिभाषा नहीं
तुम सौंदर्य हो।
तुम बुद्धि नहीं
बोध हो।
तुम स्पर्श नहीं
संपूर्णता हो।
तुम्हारे बिना
मेरा संसार बिखर जाएगा,
हर दिशा मौन हो जाएगी,
और समय थम जाएगा
क्योंकि तुम ही हो
जो मेरे भीतर की घड़ी चलाते हो।
अगर तुम ओझल हो गए
तो मैं किससे प्रश्न करूँ?
किसे पुकारूँ
जब आत्मा रोती है?
अगर तुम चले गए,
तो यह प्रेम नहीं बचेगा,
ना यह मैं,
ना यह जीवन।
क्योंकि तुम
प्रेम से अधिक हो
ईश्वर के स्पर्श की तरह हो।
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