वो लम्हे जो हमने साथ जिए,
सिर्फ करीब होने का नाम नहीं थे।
वो जिस्मों की छुअन से कहीं आगे,
दो रूहों के अटूट पैगाम थे।
उस रात हम सिर्फ पास नहीं थे,
हम एक-दूसरे में पूरी तरह खोए थे।
जैसे दो जिस्मों से एक जान बनी हो,
हम प्रेम के उसी धागे में पिरोए थे।
हमने घंटों बातें कीं, खुद को साझा किया,
दुनिया से दूर, एक-दूसरे को महसूस किया।
तुम्हारी उन बातों ने मुझे आईना दिखाया,
खुद को औरों की नजर से देखना सिखाया।
वो यादें आज भी मेरे सीने में महकती हैं,
जैसे कोई पुरानी किताब, जो रूह को सहलाती है।
मैंने उन पलों में सिर्फ तुम्हें नहीं पाया,
बल्कि जीवन जीने का एक नया हुनर पाया।
मुसीबतों से लड़ना और लोगों को समझना,
तुम्हारी सोहबत ने मुझे हर हाल में संभलना सिखाया।
मैं कभी उन लम्हों को ओझल होने नहीं दूँगा,
क्योंकि उन्हीं यादों ने मुझे 'मैं' होना सिखाया।
- अनिकेत सिंह
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