हाथों की लकीरों में जो नहीं लिखा
तकदीरों में , फ़िर क्यों जद्दोजहद इतनी सारी
न खता मेरी न खता तुम्हारी
जो पाया उसमें धीर धरो
जो हाथ न आया उसके लिए
न हाथ मलो , देखो दुनियां
कितनी हंसी है , हर खुशी हर को
मिलती नहीं है इस से ये न समझो
किस्मत नहीं खूबसूरत हमारी
बात इतनी सी है , जो समझ लो
तो गुज़र जाएगी हंसते - हंसते उमर सारी ।।
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