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सास से मांँ तक

                
                                                         
                            शुरू-शुरू में मैं तुम्हें दिल से तो माँ नहीं कह पाऊँगी,
                                                                 
                            
हो सकता है लगने लगे डर कभी पास होने से तेरे,
पर तुम मुझे बेटी बुलाना माँ!

कुछ बातें जो बयां न हो, तुम बिन बोले जान लेना,
गलती चाहे किसी की भी हो, तुम उसे भी जरा-सा डांट देना माँ!

बेखबर हूँ माँ के प्यार से, तुम मेरा हक लौटाना माँ,
सब कहते होंगे बहू, तुम मुझे बेटी बुलाना माँ!

जब नज़र आऊं निष्प्राण कभी, तो तुम नाराज ना होना,
सीने से लगा देह को, बाल सहला देना माँ!

कुछ पूछना ना बस चुपचाप गले लगाय रखना,
चाहो तो गिनना गिरते आँसू, और खामोशी सुनना माँ!

एक छोटी सी प्रार्थना है मेरी, मेरी हर ग़लती
पडोसियों से पहले मुझे बताना!

तू डांट दे वह हक है तेरा, अप्रत्यक्ष बातें मत बताना,
नाराजगी जता देना, पर कभी ताने ना सुनाना माँ!
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11 महीने पहले

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