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आत्म तत्व की खोज

                
                                                         
                            मानव मन क्यों खाली-खाली, आज तुम्हें हम रहे बताय,
                                                                 
                            
इस दुनिया का जटिल प्रश्न है—मैं हूँ कौन, कहाँ से आय?
पीछे मुड़कर जब हम देखें, आदि-अंत न कछु दिखलाय,
मैं और मैं का जटिल रिलेशन, वेद-शास्त्र सब रहे बताय।

कोई उसको बाहर खोजे, वन की गुफा में ध्यान लगाय,
कोई खोज रहा मंदिर में, घंटा जोर से रहा बजाय।
जितने धर्म बने दुनिया में, सब की खोज में वही समाय,
जितना खालीपन है दिखता, उसके बीच वही है भाय।

सूफी के संसार में वह है, कृष्णमूर्ति का जीवन आय,
परम तत्व की झलक को पाने, वाले थोड़े लोग दिखाय।
उनकी बातें इतनी सच्ची, देश-समाज के नियम हिलाय,
उनमें से कुछ ने तो अपना, जीवन पूरा दिया गंवाय।

इसी झलक ने सुकरातों को, विष का प्याला दिया पिलाय,
इसाइयत में ऑगस्टीन ने, अपने अंदर खोजा जाय।
इसी सत्य ने ईसा मसीह को, सूली पर है दिया चढ़ाय,
स्पिनोज़ा को ईश्वर में ही, सारा यह ब्रह्मांड दिखाय।

परम तत्व की खोज में भारत, नंबर एक पर पड़े दिखाय,
वेदों की तो बात अलग है, आदि-अंत न कछु दिखलाय।
उपनिषदों ने खोज लिया पर, संकेतों में रहे बताय,
ऋषि उद्दालक पुत्र को अपने, गूढ़ तत्व को रहे सिखाय।
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44 मिनट पहले

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