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दो दिन की जिन्दगी ही तो है

                
                                                         
                            क्यूूूं बर्बाद करे
                                                                 
                            
दो दिन की जिन्दगी ही तो है
हमारे माँ-बाप को
हमसे उम्मीद ही तो है
फिर इस दो दिन को बर्बाद क्यूूूं करे
क्यूूूं ना इन दो दिनों में अपने माँ-बाप का नाम रोशन
करे
दो दिन को संघर्ष और खुशी से बिताना है
और जो कुछ नहीं समझते हमें
उन्हें कुछ समझा जाना है
मारने दो ताने जो मारते हैं
बार-बार हारने वाले ही तो हार नहीं मानते
है।
चलो अपनी जिदंगी को अच्छे से सँवारते हैं
इस छोटी-छोटी समस्याओं को जड़ से उखाड़ते हैं
अब बस परिश्रम और संघर्ष करना है
इस दो दिन की जि़न्दगी में अपना नाम रोशन करना है।


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6 वर्ष पहले

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