धरती जब पानी को तरसे
सूख जाये जब जल पोखर से
पछी कलरव करें जब डर से
मेढ़क निकलें अपने घर से
बारिश आती है अम्बर से
बादल घुमड़-घुमड़ कर बरसें
पानी चूता सबके सर से
बोलो बच्चों किस शावर से
बर्वे जब जलेबियों पर बरसें
बिन छाता न निकलो घर से
पैदल चल पाओ न डर से
सड़कें भरी रहें कीचर से
निकलें न फिर पानी घर से
स्कूल न लगें पानी के डर से
घर गिर जाए एक भंवर से
सावन में ही पानी बरसे
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