अकसर मैं यही सोचता हूँ कि तुम ना होती तो क्या होता
शायद आसमाँ में कोई चाँद और सितारा ना होता
आँखों को सँवारने वाला काज़ल भी ना होता
और कलियों का रंग भी इतना प्यारा ना होता
ना होता किसी का इतना खुशनुमा कारवाँ
ना होता जैसे ज़मीं का वो आसमाँ
नदियों का भी जैसे कोई किनारा ना होता
अकसर मैं यहीं सोचता हूँ कि तुम ना होती तो क्या होता...
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