इश्क़ की जादूगरी
इश्क़ की जादूगरी से
तुम अभी तक अनजान हो,
नहीं जानते तुम
इसके असर का हुनर...
ये वो इश्क़ है
जो दिल को छूकर
रूह में उतर जाता है,
और इंसान को
उससे मिला देता है
जिसे वह बरसों से
अपने भीतर खोजता आया है।
पल में शोला,
पल में माशा—
कभी विरह की अग्नि,
कभी करुणा की वर्षा।
कभी आँखों में आँसू बनकर,
कभी होंठों पर प्रार्थना बनकर,
कभी मौन में संगीत बनकर
ये इश्क़ हमें
हमसे ही मिलाता है।
जिस दिन प्रेम
अपेक्षा से मुक्त हो जाता है,
उस दिन इश्क़
इबादत बन जाता है।
और जिस क्षण
रूह किसी रूह को
बिना छुए पहचान ले—
समझ लेना,
इश्क़ ने अपना
सबसे गहरा राज़ खोल दिया है।
इश्क़ सिर्फ़ किसी को पाने का नाम नहीं,
इश्क़ तो स्वयं को खोकर
अपने सत्य को पाने की साधना है।
-आचार्य अमित
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