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तुम मुझे फ़िर मिलना...

Tum mujhe fir milna
                
                                                         
                            तुम मुझे फिर मिलना
                                                                 
                            
तबलें की ताल बनकर
वीणा की झंकार बनकर
दुःख में सुख बनकर
बारिश में छाता बनकर
 

तुम मुझे फिर मिलना
किसी कविता की
अविस्मरणीय पंक्तियाँ बनकर
प्रेम पर आधारित किसी
उपन्यास का विराम बनकर
सुबह-सुबह घास पर तुहिन-कण बनकर
पक्षियों के वृंद का कलरव बनकर
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8 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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