रखे जो सभी पर पैनी नजर है
उसी को तो सबकी सारी खबर है
तनिक ना मैला दिल हो किसी का
वही उल्फतों का पावन नगर है
लिये जा रही पालकी वक़्त की ये
वहाँ आखिरी जिंदगी की ठहर है
ग़म हो नमक भर जिंदगी में
खुशी भी ज्यादा लगे जहर है
मज़ा बेखुदी का चखा तभी से
अलग ही आलोक की एक डगर है
-आलोक
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