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मेरे अल्फाज़

वर्षा गीत

AL Mishra

93 कविताएं

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बरस रहे बदरा बरस रहे बदरा

बरस रहे बदरा ओ मोरी गुइयाँ।।

उमड़ रहे बदरा घुमड़ रहे बदरा

बरस रहे बदरा ओ मोरी गुइयाँ।।

गरज रहे बदरा ,बरस रहे बदरा।

दमकि रही दामिनि,डरपि रह्यो जियरा।

नाच रहे केकी ,गाय रहे भेकी।

झूम रहे पादप ,ओ मोरी गुइयाँ।। बरस रहे --

ताल तलइयान में छायो है यौवन।

इठलाइ रहीं नदियाँ ओ मोरी गुइयाँ।

`जिन सखियन के घर में हैं साजन।

झूम रही सखियाँ ओ मोरी गुइयाँ।। बरस रहे ---

हमरे साजन विदेसवा में छाये।

सूख रहा तनवा ओ मोरी गुइयाँ।

बरस रहे बदरा गरज रहे बदरा।।

ओ मोरी गुइयाँ---।।

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