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नीति के दोहे (मुक्तक)

                
                                                         
                            परिवार का कद ऊँचा, सोहरत साथ होय।
                                                                 
                            
मीडिया को लेय साथ, नेता बनता सोय।।

रिपु को मत छोटा मान, मत देखो आकार।
समय पाकर चींटी भी, करती गज पर वार।।

चुगुल चोर होय घर का, कबहुँ न रोका जाय।
न करियो विश्वास ताहि, भले ही तीरथ जाय।।

Poet: Asharfi Lal Mishra,
Akbarpur, Kanpur


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6 वर्ष पहले

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