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मेरे अल्फाज़

महाप्रयाण

AL Mishra

49 कविताएं

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भूमि पर शयन ,
घेरे थे परिजन।
अश्रु पूरित थे,
सबके नयन।।
दृष्टि अपलक ,
रहित सुख दुःख।
चिर निद्रा में लीन ,
दिन रात विलीन।।
मिथ्या हुआ संसार ,
मृत्यु जीवन का सार।
देख तुम्हारा भूमि शयन ,
सब अर्पित करते श्रद्धा सुमन।।
माता हा हा कार करे ,
पत्नी सिर पीट रही।
बेटा बेटी अश्रु नयन ,
सब अभिलाषा छूट रही।।
--अशर्फी लाल मिश्र ,कानपुर देहात




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