हे!नाथ आज कर बद्ध खड़ा हूँ,
विनती अब स्वीकार करो।
जन सेवा है संकल्प ह्दय में,
सेवक पर कृपा अपार करो।।
दीनों की सेवा करें सदा हम,
यह अन्तर्मन की इच्छा हो।
नेकी से कभी न दूर हटें ,
कितनी भी कठिन परीक्षा हो।।
स्वार्थ रहित संकल्प ह्दय में,
लेकर आगे मैं बढ़ता जाऊँ।
यह ह्दय द्रवित हो जाये मेरा,
यदि पथिक कोई अक्षम पाऊँ।।
ऊँच-नीच और जाति-पांति का,
मन भाव न अपने पास रहे।
यह जीवन सफल मेरा होगा,
मुझे इतना दृढ़ विश्वास रहे।।
रहे राष्ट्रनीति सदा नीति मेरी,
छल कपट से कोसों दूर रहूं।
मैं संकल्पी जन सेवक हूँ,
सेवा मद में नित चूर रहूं।।
व्यथा,लालसा,द्वेष देह से,
परमेश्वर दूर विकार करो।
जन सेवा है संकल्प ह्दय में,
सेवक पर कृपा अपार करो।।
निस्वार्थ भाव उपजे मन में,
'प्रभु' ऐसा वरदान दीजिए।
पहचान रहे भूलेे-भटकों की,
मुझको इतना ज्ञान दीजिए।।
व्याधिग्रस्त मानुष तन का,
हर पल मैं सम्मान करूँ।
बेबस,निर्बल,निस्सहायों का,
मैं न कभी अपमान करूँ।।
सत्कर्मों के निर्वाहन में,
पथ देश प्रगति का अपना हो।
भद्रों के मन से चित्त मिले,
तब पूरा कवि का सपना हो।।
सनाथ रहें सब व्यक्ति धरा पर,
नव जीवन को आधार मिले।
मायूषी का आलम छंट जाये,
हर चेहरे पर मुस्कान खिले।।
सब दीन हीन रहें निर्विकार,
'प्रभु' सबका बेड़ा पार करो।
जन सेवा है संकल्प ह्दय में,
सेवक पर कृपा अपार करो।।
अखिलेश शुक्ला(ग्राम-नवाजपुर,खुटार)
जनपद शाहजहांपुर उ0प्र0
मो:8707009692,8726447759
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