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पास हो के भी फ़ुर्क़त हो .... तुम

                
                                                         
                            काफी है कि निहार लेता हूँ
                                                                 
                            
पास हो के भी फ़ुर्क़त हो,

मेरे हर तंज बेअसर हैं अब
अब भी फूल हो कि अब पर्वत हो,

सदियों से थी मुझे तलाश जैसे
मेरे खवाबों की हकीकत हो,

दामन आज भी क्यों भीगा सा है
शायद आज भी मेरी ही कोई हरकत हो,

कहने को तो मोहताज नहीं हूँ
पर तुम मेरी साँसों की जरूरत हो |



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6 वर्ष पहले

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