तेरे प्यार की खुशबू से,
महकी ये सारी फिज़ाएँ हैं।
तेरे जुल्फ़ों की छू छूकर,
पागल सी हुई हवाएँ हैं।
तेरे आँखों की काजल से,
बादल में हुआ अंधेरा है।
भीगी बालों के छाँव से,
बारिश का रूप घनेरा है।
तेरी कमरिन क़मर कमीनी,
जब इधर-उधर बलखाती हैं।
नभ में जैसे बिजली चमके,
मेघों से तीर चलाती हैं।
तेरी अदा की कायल दुनियॉं,
रही क़यामत गवाही है।
बड़े बूढ़े युवां भी कहते,
वाह! क्या अदाएं तेरी हैं।
- आकाश त्रिपाठी
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