अक्टूबर की ठंडी शाम में
जब तुम मेरा हाथ थामती हो,
तो लगता है जैसे मौसम नहीं, तुम मुझे छू रही हो।
तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर
कुछ देर चुप रहना ..मेरे लिए यही
सबसे खूबसूरत बातचीत है।
तुम्हारी आँखों में अपना नाम
देखना अच्छा लगता है,
और तुम्हारे पास रहकर
दुनिया से थोड़ा दूर हो जाना।
काश ये अक्टूबर यहीं ठहर जाए—
एक तुम, एक मैं,
और हमारे बीच बेहद गहरी मोहब्बत।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X