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किसी की बंदगी को यूँ, रुसवा किए जाना नहीं अच्छा।

                
                                                         
                            हरेक दोस्ती को, हदे-दिल तक, लिए जाना नहीं अच्छा
                                                                 
                            
बहुत अच्छा है.. ना पाना , पा के खोना नहीं अच्छा

अजब है लोग दुनिया के, बनाते हैं ख्वाबों के महल
ख़्वाब में खोना तो बेहतर है, उसमें जीना नहीं अच्छा

क़िस्मत से गर तुम, किसी, ग़ुल के क़रीब से गुज़रो
महक तक ठीक है लेकिन, ठहर जाना नहीं अच्छा

मिले जो राह में कांटे, गुज़र जाना, तुम हंस कर ही
हर एक बात पे आँखों का, यूँ भर आना नहीं अच्छा

खिलौना जान कर दिल से, बहल तो जाओगे लेकिन
इन मासूम .. जज्बातों को यूँ, तड़पाना नहीं अच्छा

चले जाना.. पलट कर तुम, कभी वो याद आए तो
सर-ए-बाज़ार, यादों को, यूँ बिखराना नहीं अच्छा

हर एक ख़्वाब .. हो पूरा, ये कहीं लिखा तो नहीं है
थोड़ा ग़म भी है जायज़, पर यूं मर जाना नहीं अच्छा

मोहब्बत में अदब का, पास रखना लाज़मी है, ‘अजय’
किसी की बंदगी को यूँ, रुसवा किए जाना नहीं अच्छा।
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4 घंटे पहले

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