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वो फसल बनकर कभी उगता नहीं।

                
                                                         
                            समय का पहिया चलता रहता है,
                                                                 
                            
रात ढलती है, दिन निकलता रहता है।
बचपन जवानी में बदल जाता है,
जवानी बुढ़ापे में ढल जाता है।

कल जो मुट्ठी में रेत सा था,
आज वही यादों का खेत सा है।
हम सोचते हैं समय को रोक लेंगे,
पर समय हमें ही बदल देता है।

घड़ी की सुइयाँ नहीं, हम चलते हैं,
समय के साथ हम ही बदलते हैं।
जो वक्त पर बोया नहीं जाता,
वो फसल बनकर कभी उगता नहीं।

समय किसी का मित्र नहीं, शत्रु नहीं,
वो तो बस एक निष्पक्ष साक्षी है।
तुम जैसे कर्म करोगे, वैसा फल देगा,
समय कभी किसी का कर्ज नहीं रखता है।
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54 मिनट पहले

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