बचपन के अल्हड़ पन से मेरे बहुत परेशान थी, माँ
हर रोज़ समझाती थी, मेरी माँ
जीवन की कटिहनाइयों से मुझे बचाती थी माँ
उनका समझाना मुझे चुभ सा जाता था
ज़माना बुरा है, कहती थी मुझसे माँ
अपनी प्यार भरी आँखों से हर बार दुनिया का आईना दिखाती थी माँ
सही गलत से मेरा परिचय करवाती थी माँ
माँ तुम नहीं हो अब समझ आया है,
क्यूँ तुम हर रोज़ मुझे आईना दिखाती थी!!
सदफ, हरदोई, उत्तर प्रदेश!
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