सोम मंगल बुध नहीं बाबा
अब मेरा भी इक वार दो,
मुझको भी सवार दो।
थक सी गई हु बाबा
दुनिया के जंजालों से
या तो अपने पास बुला लो
या मेरा जीवन सवार दो
जहाँ न हो दुख चिंता वैर क्रोध
हा इक ऐसा संसार दो
हा बाबा मेरे जीवन को इक नई धार दो।
मन की पीड़ा मन ही जाने,
फिर भी मन को मन ही समझाए
अब तो बाबा मेरे हर दुख का उद्धार करो,
मेरी डग मग नैया को पार करो,
बाबा मेरा भी कल्याण करो,
मेरी हर समस्याओं को सवार दो।
बाबा अब मुझको अपना इक संसार दो।।
दे दो न बाबा, इक छोटे से वर की तो बात है,
हा बाबा मुझको भी अपना संसार दो।
— अचला तिवारी’
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