आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सोम मंगल बुध नहीं बाबा

                
                                                         
                            सोम मंगल बुध नहीं बाबा
                                                                 
                            
अब मेरा भी इक वार दो,
मुझको भी सवार दो।
थक सी गई हु बाबा
दुनिया के जंजालों से
या तो अपने पास बुला लो
या मेरा जीवन सवार दो
जहाँ न हो दुख चिंता वैर क्रोध
हा इक ऐसा संसार दो
हा बाबा मेरे जीवन को इक नई धार दो।
मन की पीड़ा मन ही जाने,
फिर भी मन को मन ही समझाए
अब तो बाबा मेरे हर दुख का उद्धार करो,
मेरी डग मग नैया को पार करो,
बाबा मेरा भी कल्याण करो,
मेरी हर समस्याओं को सवार दो।
बाबा अब मुझको अपना इक संसार दो।।
दे दो न बाबा, इक छोटे से वर की तो बात है,
हा बाबा मुझको भी अपना संसार दो।

— अचला तिवारी’
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
20 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर