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बेटियों की वीर गाथा

                
                                                         
                            याद करो सन 57 की गाथाएँ
                                                                 
                            
घूँघट में रहती बेटी. दहशत में माताएँ..
उनकी आजादी की बेड़ी को.
छूना भी मुश्किल था..।
छिपा जिसमें आज की.
विश्व विजयी गाथा का हल था...।
अंग्रेजी हुकूमत के आगे.
क्या आज क्या उनका कल था.।
कन्यायों की बात तो क्या.
महिलाओं का भी जीवन दूभर था.।
कला संस्कृति सौंदर्य की देवी का.
पथ पर चलना मुश्किल था.।
आज विजयी पताका फहराकर.
उनको भी करारा जवाब दिया.।
जो बन आजादी का दुश्मन.
हिजाबी सीखे देता था.।
सलाम करो इस बेटी को.
जो देश को रोशन कर आयी..।
छोटे से गांव की बेटी.
जग में नाम कमा लायी..

 
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9 महीने पहले

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