आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

धागे का प्रेम था

                
                                                         
                            दिल की बातें करते हैं,
                                                                 
                            
मैंने सोचा नहीं था,
शायद लगता है मदहोश हो जाएँगे—

कभी किसी की याद में,
इतना पागल हो जाएँगे,
हमें,
लगता है,
हम अपने आप को कभी भूल नहीं पाएँगे कभी...!

मेहमान की याद में,
याद ही तिनका थी—
आप हमें याद ज़रूर करोगे—
कभी ख्यालों में,
साथ हमें याद आएँगे—

रात के अँधेरे में,
रोशनी के उजाले में।

उज्जवल की तरह दिल को,
अत्यधिक शंका के लिएसहारा सिर्फ है।

और हम,
अपने साथ,
आपको भूल न पाएँगेपैगाम ,
यह लिखे कितने भी साथ हों।

हम एक नाम हैं,
धागे का प्रेम था।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर