पास रहकर भी वो हमसे दूर रहते हैं, दिल के जज़्बात आँखों से ही बहते हैं।
मौसम बदल रहा है और बादल भी चल रहे, हवाओं के संग हम तेरी यादों में जल रहे।
क्या बात है जो तूने यूँ लब को सी लिया, हम तो तेरी खामोशी को ही ज़हर मान पी लिया।
हर मोड़ पर सिर्फ़ तेरा ही अक्स दिखता है, उमंग के सितारों में तेरा ही नाम लिखता है।
चेहरा तेरा देखकर मैं खुद को भूल जाता हूँ, ख्यालों में तेरे खोकर खुद से ही बतियाता हूँ।
नदियों की धारा सा बहता है तेरा ये सुहानापन, तेरी जुल्फों के साए में कट जाए मेरा ये जीवन।
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