गोपियाँ दिन-रात प्रेम की प्यासी,
कृष्ण के नाम से प्यास बुझातीं।
चाहत मन की इतनी है गहरी,
कोई कह कर भी कम न कर पाए।
मन की निष्ठा में उद्धव का ज्ञान,
उद्धव कहते कृष्ण से प्रेम तो मोह का जाल।
कृष्ण कहते बहती गंगा और समुद्र की लहर,
से भी कई गुना बढ़कर प्रेम की भावना।
कण-कण में हूँ कहूँ,पर राधे के,
समीप रहूँ गोपियों की निष्ठा से बंधा हूँ।
प्रेम की इस बहती धारा पर ही,
उद्धव कुछ तो ज्ञानी हैं परंतु।
प्रेम की भक्ति ज्ञान से कई गुना ऊपर है,
मीरा ज्ञानी पद कह जाती,
पर प्रेम के इस मोह से छूट नहीं पाई।
प्रभु मैं तो ज्ञान को ही सर्वोपरि मानता हूँ,
यह बात उद्धव पत्र लेकर आए,
तब ही गोपियाँ दिन-रात कृष्ण का नाम जपतीं।
उद्धव करते प्रयास परंतु गोपियाँ कहतीं,
मन की कोई चंचलता नहीं हमें लगेगी।
हमें ज्ञान से मुक्त करो और प्रेम में बांधो,
जाते-जाते कृष्ण से कहना मिलें एक बार;
ज़रूर देना उद्धव संदेश हमारा।
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