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जमाना आंसू देखा है

                
                                                         
                            कभी किसी से कहकर ,
                                                                 
                            
रो - दोगे ,
तो वह हंस पड़ेंगे ,
लेकिन समंदर के आसमान के सामने ,
रो - कर भी ,
खुद को मग्न कर ,
खुद की मंगल के बाद सोचेंगे।
हस्ती के दामन में ,
फिर भी वह आपको ,
बार-बार पूछेंगे ,
जमाना क्या ?
जमाना क्या करेगा ,
ज्यादा से ज्यादा ,
आपका आंसू देखेगा।
भीतर ही भीतर  अपमान कर,
अपने विचारों को और कठोर बनकर ,
आपके आंसू की ओर देखकर ,
मगन होगा,
सामने नहीं तो ,
किसी और के सामने ,
आपकी बातों का उल्लंघन करेगा।
कभी किसी से कहकर ,
रो - दोगे ,
तो वह हंस पड़ेंगे ,
लेकिन समंदर के आसमान के सामने ,
रो - कर भी ,
खुद को मग्न कर ,
खुद की मंगल के बाद सोचेंगे।
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1 hour ago

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