कभी-कभी रूक जाया करो,
थम जाया करो,
अपनी भी कुछ बातों को,
समझ लिया करो।
बेचैनी में क्यों पड़े,
हो रहे क्यों बेचैन,
अब की नहीं तो अगली बार ,
कभी रुक कर अपने बारे में सोचो।
थोड़ा काम ही सही,
कभी-कभी,
अपने से दूर,
खुद की सुना करो।
मन में भार लिए कितना फिरोगे,
कब तक यूं ही भागोगे,
अपनी कुछ हस्ती को,
याद कर मग्न रहो।
कब की बात ,
कब तक याद रखेगा जमाना ,
खुद पर भरोसा कर ,
गैरों को भूल जाओ।
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