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फूलों पर विचार

                
                                                         
                            खिल रहा जीवन का दिनकर ,
                                                                 
                            
फूलों पर भी विचार करो ,
सुंदर खुशबू हितपर आभा का ,
अलंकार की परिभाषा देकर सोचो,

रुख़ मोड़ हवा चल रही है,
क्या मालूम परिंदे को,
उसकी मंज़िल हवा के साथ है,
या उसके नसीब में।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 hours ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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