खिल रहा जीवन का दिनकर ,
फूलों पर भी विचार करो ,
सुंदर खुशबू हितपर आभा का ,
अलंकार की परिभाषा देकर सोचो,
रुख़ मोड़ हवा चल रही है,
क्या मालूम परिंदे को,
उसकी मंज़िल हवा के साथ है,
या उसके नसीब में।
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