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पुलवामा पर कविता

                
                                                         
                            कांप उठता है दिल मेरा, जब वो मंजर याद आता है।
                                                                 
                            
भर आती हैं आँखें मेरी, कतरा-कतरा रो जाता है।

पुलवामा के वीर वे, मुझसे न भूले जाएंगे।
कायरों के कृत्य ये, सदियों धिक्कारे जाएंगे।

भले ही न जिन्दा हों वे,मगर दिल में रहते हैं।
देश ही है जान उनकी, आज भी वे कहते हैं।

अपनों की गद्दारी ने, अपनों को ही लूटा है।
अपनों की बेवफाई से,ये दिल मेरा टूटा है।

पीठ पीछे से हमला, यूं कायर ही करते हैं।
वीर नहीं डरते मरने से,वीर शान से मरते हैं।

नम हैं आँखें सबकी, पूरा भारत रोता है।
वीरों का अंजाम भी, क्या कभी ऐसा होता है।

रखा है मस्तक मेरा, उन वीरों के चरणों में।
लिख न पाऊं महानता, मैं उनकी चन्द वर्णों में।

वेलेंटाइन डे के कारण, भूलना न उन वीरों को।
अभिनय करता है नमन,भारती के उन असली हीरों को।
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2 वर्ष पहले

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