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चाँद निकल आओ न

                
                                                         
                            अन्न जल का त्याग कर
                                                                 
                            
व्रत तप किया हमने
अब और इंतजार कराओ न
चाँद निकल आओ न !

यूँ तो आ जाते थे
दीदार करा जाते थे
तक रही है आसमा में नजरे
बेकरार कराओ न
चाँद निकल आओ न !

क्यों रूठें हो, खता क्या हुई??
हुई अगर खता तो
सजा कोई सुनाओ न
चाँद निकल आओ न !

इस तरह कोई छलता है
पाषण हो तुम हिय
क्यों नही पिघलता है
अभि तुम समझाओ न
चाँद निकल आओ न !
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16 घंटे पहले

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