तुम्हारी प्रीत के मधुरस की
चाँदनी छलक-छलक
ह्रदय कलश में संचित हो
जीवन तरंग में
खुशियों के तराने
गुनगुना रही और मैं
आल्हादित हो
मगन सी
प्रेम पथ को
अप्रतिम आनन्द की
लहरों से संवार
दिल की गहन अनुभूतियों में
मेरे साये में
तुम्हारे अक्स को
संजो रही….!!!
- आरती बजाज ‘मन’
वापी-गुजरात
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