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अमर प्रेम

Amar Prem
                
                                                         
                            मधुरिम सुहानी भोर में,
                                                                 
                            
पेड़ो के झुरमुटों से

छन के आती धूप में,
मन की खिड़की में

रोशन होती तेरी,
यादों की परछाईयाँ

जहाँ हंसीं मुलाकातों के
सिलसिलों में

मेरे "ललाट" पर,
प्रगाढ़ चुम्बन रूपी
विश्वास की मुहर से

अपने "अमरप्रेम" का हस्ताक्षर
अंकित कर

लाल बिंदिया में
आशाओं का सूरज प्रदीप्त कर दिया

- आरती बजाज ‘मन’
वापी-गुजरात

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8 वर्ष पहले

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