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सुषमा का स्वराज

                
                                                         
                            मेरे प्यारे देशवासियों मेरी आज की यह रचना "सुषमा का स्वराज" उनके आत्म सम्मान में सादर समर्पित है। ईश्वर से प्रार्थना है कि स्वर्ग में उन्हें अपनी चरणों में जगह दें।
                                                                 
                            

" सुषमा जी अमर रहें। जय हिन्द। जय भारत"

मेरी रचना का शीर्षक है-
       सुषमा का स्वराज- 
          -***-
जाने से पहले उनके अंतिम थे यह उदगार
कश्मीर को मिल गया भारत का पूरा प्यार

जा रही हूं स्वतंत्रता पर देकर सुन्दर उपहार
जश्ने आजादी का असली होगा यह त्यौहार

देकर यह संदेश वीरांगना स्वर्ग गई सिधार
भारत मां के मत्थे से कलंक दिया उतार

बचपन से देख रही थी कश्मीर में बहता खून
काश्मीर की बात से स्वराज को मिला सुकून

धीरे-धीरे जाग उठा है अब मेरा हिन्दुस्तान
थर-थर कांप रहा है दुनिया में पाकिस्तान

सुषमा का सपना जनता ने कर डाला साकार
देकर भारी बहुमत मजबूत बना दी सरकार

भारत मां के सच्चे सपूतों सुन लो मेरी फरियाद
देश की एकता और अखंडता रखना पहले याद

आंख नहीं नम करना मेरी अंतिम आज विदाई
मेरे प्यारे देशवासियों आज सुषमा हो गई पराई

कवि- पं. अमरेश उपाध्याय


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7 वर्ष पहले

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