कार्तिक मास
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
भोर भये कर तारा-स्नान,
तुलसी-पीपल दीपदान।
आरोग्य, संपदा, यश-कीर्ति देता,
आकाश-दीप करे कल्याण।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
दीपावली हो या अहोई अष्टमी,
धनतेरस हो या भैया दूज,
कार्तिक के इन पावन पर्वों से
दूर हों संकट, मिटे हर दूज।
हर आँगन में दीप जलें,
हर मन में हो सुख की छाई।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
आता छठ का पावन त्यौहार,
गंगा तट बहती सुगंधित बयार।
उगते सूरज को अर्घ्य चढ़ाएँ,
ढलते रवि को शीश नवाएँ।
सुख-दुःख में सम रहना सिखलाए,
जीवन की सुंदर सीख बताए।
भक्ति-भाव से मन हरषाए,
हर घर सुख-समृद्धि ले आए।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
गोपाष्टमी पर गौ-सेवा से,
हो जाती माधव की सेवा।
आँवला नवमी पूजन-दान,
दे तन-मन को आरोग्य महान।
सेवा, श्रद्धा, दान-पुण्य से,
जीवन में आए सुख-समृद्धि।
हर मन में हो भक्ति-भावना,
हर आँगन में छाए खुशहाली।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
देव-प्रबोधिनी एकादशी आती,
व्रत-पूजन से मंगल गाती।
देव जागते, शुभ काम शुरू,
तुलसी-शालिग्राम विवाह मधुर।
ईख अर्पित कर भक्त मनाते,
मधुर फले जीवन की तरुणाई।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
द्वादशी को विष्णु मंदिर में,
जो ध्वजा चढ़ाता श्रद्धा से,
पुण्य-फल पाता जीवन भर,
हरि-कृपा बरसे उसके घर।
भक्ति-भाव से जो सिर झुकाए,
उसके जीवन में हो सुख-छाई।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
बैकुंठ चतुर्दशी का पावन दिन,
हरि-हर मिलन कराता अभिनव।
शैव-वैष्णव एक हो जाते,
भक्ति के दीप हृदय में जलाते।
हरि और हर का प्रेम सिखाता,
मिटती मन की सारी लड़ाई।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
पूरे मास करो गंगा-स्नान,
श्रद्धा से करते रहो दीपदान।
मन का तम हर, ज्योति जगाओ,
जीवन में नव प्रकाश लाओ।
पूर्णिमा पर मंदिर दमकें,
दीपों से जगमग हो अंगनाई।
हर दिशा में दीपोत्सव हो,
हर घर में मंगल की शहनाई।
कहीं भंडारा, कहीं प्रसाद,
हर मुख पर हो हरि का नाम।
पावन हो तन, पावन हो मन,
भक्ति से भर जाए जीवन।
करुणा, सेवा, प्रेम जगाकर
मिट जाए मन की हर तन्हाई।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
दीप जलें तो तम मिट जाए,
हर मन में उजियारा आए।
भक्ति, दया, सेवा और दान—
यही है कार्तिक की सच्ची कमाई।
कार्तिक मास बड़ा ही पुण्यदायी,
कैसे करूँ मैं इसकी बड़ाई।
— चित्रा शर्मा ‘वीथिका’
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